जानिए हिमाचल प्रदेश की कुछ अनोखी और रोचक बातें

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हिमाचल प्रदेश खूबसूरत वादियो, शीतल और मनमोह वातावरण के लिए पहचान जाता है। घूमने के शौकीनों, खासकर पहाड़ों को पसंद करने वालों के लिए हिमाचल प्रदेश की यात्रा करना ज़रुरी है। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला हिमालय हिमाचल प्रदेश से गुज़रती है। हिमाचल प्रदेश में सर्दियां बेहद कड़ाके की होती हैं और गर्मियों के मौसम में ज्यादा गर्मी नहीं पड़ती। हिमाचल प्रदेश घूमने का सबसे अच्छा समय वसंत का है जो कि फरवरी से अप्रैल का होता है।  हरी घास के मैदान और सदाबहार जंगलों के अलावा हिमाचल प्रदेश एक मनमोहक वादियो का समावेश लोगो का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

कालका से शिमला को जोड़ने वाली नैरोगेज रेल ट्रैक को यूनेस्को ने विश्व विरासत कहा है। 1864 में अंग्रेजों ने शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था। शिमला को कालका से जोड़ने के लिए ‘कालका शिमला रेल मार्ग’ साल 1898 में बनाया गया। पिछले 100 सालों सें टॉय ट्रेन इस रेल मार्ग पर दौड़ रही है। टॉय ट्रेन करीब पांच घंटे की सफर में 96 किमी की दूरी तय करती है। इस दरम्यान यह 107 टनल, 864 पुल और 917 घुमावदार और तीखे मोड़ों से गुजरती है। टॉय ट्रेन नैरो गेज पर चलती है, इंजन के साथ 4 से 5 डिब्बे होते हैं। 2007 में हिमाचल प्रदेश ने नैरोगेज रेल ट्रैक ‘विरासत’ का दर्जा दिया। एक साल बाद 2008 में यूनेस्को ने इसे ‘विश्व विरासत’ घोषित कर दिया।

हिमाचल प्रदेश में देवी देवताओं के कई मंदिर हैं इसलिए इसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। गाती हुई नदियों और सुन्दर खेतों वाले इस इस सुन्दर प्रदेश में करीब 2000 देवी देवताओं के  मंदिर हैं। आकर्षक पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का इतिहास बहुत समृद्ध और विविध है इतिहासकारों ने जो सबसे चैंकाने वाले तथ्य ढूंढे हैं। इससे संबंधित कई संदर्भ वेदों, महाभारत और दूसरे कई पुराने साहित्यों और मिथकों में मिल जाएंगे। हिमाचल प्रदेश प्राचीन काल में इस क्षेत्र की जनजातियों का दास कहा जाता था| बाद की शताब्दियों में पर्वतीय हिस्सों के मुखिया लोगों ने मौर्य, कुषण, गुप्त राजवंशों की अधीनता स्वीकार की | 19वीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने इस क्षेत्र के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया | जब अंग्रेज यहां आये  तो उन्होंने गौरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। उस समय से ही इस क्षेत्र ने भारतीय इतिहास के कई उतार चढ़ाव देखे हैं। 1950 में हिमाचल प्रदेश के एक राज्य बन जाने के बाद ब्रिटिश भारत की गर्मियों की राजधानी रहे शिमला को इस राज्य की राजधानी बना दिया गया।

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हिमाचल प्रदेश को “देव भूमि” भी कहा जाता है इस क्षेत्र में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है। आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद यह ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के हाथ में आ गया। सन 1857 तक यह महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य (पंजाब हिल्स के सीबा राज्य को छोड़कर) का हिस्सा था। सन 1950 मे इसे केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, लेकिन 1971 मे इसे, हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971 के अन्तर्गत इसे 25 जनुअरी 1971 को भारत का अठारहवाँ राज्य बनाया गया।

हिमाचल प्रदेश का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि मानव अस्तित्व का अपना इतिहास है। इस बात की सत्यता के प्रमाण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में हुई खुदाई में प्राप्त सामग्रियों से मिलते हैं। प्राचीनकाल में इस प्रदेश के आदि निवासी दास, दस्यु और निषाद के नाम से जाने जाते थे। उन्नीसवीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने इस क्षेत्र के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया। जब अंग्रेज यहां आए, तो उन्होंने गोरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

राज्य के महत्वपूर्ण खनिज है- नमक (रॉक साल्ट), स्लेट,  जिप्सम,  चूना-पत्थर,  बेराइट्स, डोलोमाइट आदि। प्रदेश के कुल क्षेत्र  के 64 प्रतिशत भाग में वन है वन्यजीवों में कस्तूरी  हीरन, लंबा सिंह वाला जंगली बकरा, थार बकरी, सही आदि पशु और मोनल,  ट्रेगोपैन, कोकियाखा आदि पक्षी उल्लेखनिय है। भेड़ पालन यहां का अन्य प्रमुख व्यवसाय है।

हिमाचल पहला राज्य है जहां प्लास्टिक बैग्स पर रोक लगाई गयी थी। देश के कई राज्यों में अब भी प्लास्टिक बैग्स के बंद करने लिए बहस हो रही है। कुछ राज्यों में रोक के बावजूद प्लास्टिक के बैग्स धड़ल्ले इस्तेमाल होते हैं। हिमाचल प्रदेश पहला राज्य था जहां प्लास्टिक के बैग्स के इस्तेमाल पर साल 2003 ही में रोक लगा दी गई थी। हालांकि 1999 के पहली तारीख से ही इसपर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी थी। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बैन के बावजूद सिर्फ शिमला शहर से 4-6 टन प्लास्टिक के कचरे पैदा होते हैं इसकी सबसे बड़ी बजह पर्यटकों का आना है हिमाचल के ज्यादातर पर्यटन शहर प्लास्टिक के कचड़े को निपटाने में परेशान हैं। पर्यटकों का पसंदीदा शहर मनाली में प्लास्टिक के बैग्स के साथ ग्लास और प्लेट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही घर या दूकान के आगे कचड़ा होने पर 5,000 रुपया का जुर्माना भी तय किया गया है। हालांकि मनाली जानेवाले पर्यटकों को थोड़ी छूट दी गई है, कचड़ा फैलाते पकड़े गए तो साफ करवाकर छोड़ दिया जाएगा।

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सेब का नाम सुनते ही कश्मीर का नाम याद आता है। सेब उत्पादन में पहले नंबर पर कश्मीर है, जबकि दूसरे नंबर पर है हिमाचल प्रदेश। यहां के बागानों से हर साल 5 लाख टन सेब उपजता है, राज्य के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक फलों के बागनों के 49 फीसदी क्षेत्र में सेब के पेड़ लगे हैं। हिमाचल में सबसे अधिक फलों की किस्में मिलती हैं इनमें 85 फीसदी सेब ही हैं सेब का बाजार 3,5000 करोड़ रुपये का है। शिमला, किन्नौर, कुल्लू, मण्डी, चम्बा के साथ सिरमौर और लाहुल स्पीति जिलों के कुछ हिस्सों में सेब के बागान मिलते हैं। 5 हजार फीट की ऊंचाई पर उगने वाली सेब की किस्में अपने स्वाद के लिए मशहूर हैं। दुनिया के सारे तरह के फल हिमाचल प्रदेश में खाने को मिल सकते हैं, बस समुद्री इलाकों के कुछ फलों को छोड़कर मैदानी और घाटी के इलाकों में ज्यादातर आम, लीची, अमरूद, लोकाट, खट्टे अंजीर, बेर, पपीता, अंगूर, कटहल, केला, आडू , प्लम , नाशपाती और स्ट्रॉबेरी मिलते हैं।  वहीं, 1500 मीटर से उंची जगहों पर सेब, नाशपाती, चेरी, बादाम, अखरोट, स्ट्राबेरी के साथ खुबानी, बादाम, चिलगोजा, पिस्ता नट, चेस्टनट, हेजलनट, अखरोट, अंगूर और हॉप्स की ढेरों किस्में हैं।

क्या आप जानते है हिमाचल प्रदेश से जुडी ये रोचक बातें?

  1. शिमला घुमने का सबसे रोमांचक तरीका, कालका-शिमला रेलवे है। इसे टॉय ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन रोचक बात तो यह है। की कालका रेलवे को यूनेस्को (UNSECO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
  2. क्या आप जानते है  कालका-शिमला टॉय ट्रेन  806 पुलों, 103 सुरंगों और 18 स्टेशनों से होक गुजरती है।
  3. धर्मशाला स्थित HPCA क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे सुंदर क्रिकेट स्टेडियम में से एक है।
  4. क्या आप जानते है  हिमाचल प्रदेश के कसोल को ‘मिनी इसराइल‘  के उपनाम से भी जाना जाता है।
  5. क्या आप जानते है  हिमाचल केरल के बाद भारत का दूसरा सबसे कम भ्रष्ट राज्य है।
  6. हिमाचल प्रदेश देवताओं की भूमि है लगभग हर गांव के अपने अलग-अलग देवी देवता हैं, साथ ही हर जगह लोकप्रिय मेले और त्योहार आदि मनाए जाते हैं।
  7. शिमला पूरे एशिया में एकमात्र प्राकृतिक आइस स्केटिंग रिंक खेल के लिए प्रसिद्ध  है।
  8. ‘हिमाचल प्रदेश’ नाम संस्कृत के विद्वान आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने दिया था। हिमाचल दो शब्दों से मिलकर बना है- हिम+अचल। हिम यानी बर्फ और अचल यानी पहाड़।
  9. पॉलिथीन और तंबाकू पर बैन लगाने के बाद उसे सही तरीके से लागू करने में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है।
  10. हिमाचल 8,418 MW बिजली पैदा करता है। देश का मेगावॉट क्षमता का पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन आजादी से पहले हिमाचल के जोगिंदरनगर में शुरू हुआ था।

हिमाचल प्रदेश कैसे पहुंचें
हिमाचल प्रदेश राज्य सैलानियों के लिए भारत में मनोरंजन और पर्यटन के लिए पसंदीदा स्थान है। यह राज्य हिमालय की तलहटी की शांति में बसा है। राज्य में सैलानियों की गतिविधि में वृद्धि ने संचार नेटवर्क के विकास में भी बहुत योगदान दिया है। देश के किसी भी हिस्से से इस राज्य में आसानी से पहुंचा जा सकता है और हिमाचल प्रदेश में पहुंचना कोई मुश्किल काम नहीं है।

हवाई मार्ग से
हिमाचल प्रदेश राज्य में तीन हवाई अड्डे हैं, इनमें कुल्लू और मनाली के पास भुंतुर, धर्मशाला के पास गग्गल हवाई अड्डा और शिमला के पास जुबरहट्टी शामिल हैं।

रेल से
इस राज्य के सभी प्रमुख शहरों में रेलवे स्टेशन हैं। शिमला, पालमपुर और जम्मू रेलवे स्टेशन काफी लोकप्रिय हैं और इनमें देश के सभी हिस्सों से रेलें आती हैं।

नोटः हिमाचल के लिए मुंबई, कोलकाता और देश के कुछ अन्य महत्वपूर्ण शहरों से सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में नई दिल्ली से ट्रेन बदलने की जरुरत होती है।

सड़क मार्ग से
राज्य का सड़क नेटवर्क बहुत विकसित है और उत्तर भारत के सभी प्रमुख शहरों से यह जुड़ा है। यहां से चंडीगढ़ 117 किलोमीटर और दिल्ली 343 किलोमीटर है।

अंबाला से शिमला की दूरी 151 किलोमीटर है। हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम राज्य के लिए और राज्य से अन्य पड़ोसी राज्यों के लिए कई बसें चलाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 1-ए, राष्ट्रीय राजमार्ग 20, राष्ट्रीय राजमार्ग 21, राष्ट्रीय राजमार्ग 21-ए, राष्ट्रीय राजमार्ग 22, राष्ट्रीय राजमार्ग 70, राष्ट्रीय राजमार्ग 72, राष्ट्रीय राजमार्ग 73-ए और राष्ट्रीय राजमार्ग 88 हिमाचल प्रदेश राज्य से जुड़े हैं।

हिमाचल प्रदेश में शापिंग
किसी भी और जगह की तरह हिमाचल प्रदेश भी अपने लोकल हस्तशिल्प और कलाकृतियों के लिए मशहूर है। खरीददारी के शौकीनों के लिए हिमाचल प्रदेश में खरीददारी के कई मौके हैं। हिमाचल प्रदेश में किसी भी जगह पर क्यों ना हों, खरीददारी का भरपूर मज़ा ले सकते हैं।

तिब्बती व्यापारियों के पास भी आपको हस्तशिल्पों और हैंडलूम के सामानों की शानदार रेंज मिल जाएगी। उनके द्वारा बेचे जाने वाले मुलायम ऊनी उत्पाद हिमाचल प्रदेश में खरीददारी में रुचि रखने वाले लोगों के बीच बहुत पसंद किये जाते हैं।

हिमाचल प्रदेश में खरीददारी करते हुए आप इन वस्तुओं को देख सकते हैंः

  • कुल्लू शाल, हिमाचली टोपी
  • तिब्बती कालीन
  • ऊनी स्वेटर, जैकेट, कार्डीगन, दस्ताने
  • सेब, अचार, जैम और जूस
  • कपड़ों पर बौद्ध चित्र
  • मेटलवेयर
  • चांदी और फिरोज़ा के गहने
  • बौद्ध और हिंदू चित्रों वाले पोस्टकार्ड

पूरे राज्य में कई सरकारी एंपोरियम और निजी दुकानें हैं। शिमला, मनाली, डलहौजी और धर्मशाला में ज्यादातर माॅल रोड पर मौजूद हैं।

हिमाचल प्रदेश में शाॅपिंग के लिए तिब्बती बाजार भी अच्छी जगह है। शाम होते होते सड़क किनारे कई स्टाल लग जाते हैं जहां आपको अच्छी वैराइटी का सामान अच्छे दामों पर मिल सकता है।

हिमाचल प्रदेश में खरीददारी करते हुए धोखेबाज़ों से सावधान रहें जो कि आपको नकली सामान असली बताकर अधिक दामों पर बेच सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में देखने लायक जगहें:
हिमाचल प्रदेश की अनंत खूबसूरती, सुहाना मौसम और मैत्रीपूर्ण लोग इसे एक बड़ा पर्यटन आकर्षण होने के साथ साथ धरती पर स्वर्ग का अहसास कराते हैं। सैलानियों को हिमाचल प्रदेश में इतने पर्यटन आकर्षण मिल जाएंगे कि सभी को देखने के लिए बहुत सारा समय निकालना होगा। हर जिले में बड़ी संख्या में और बहुत अच्छे पर्यटन स्थल हैं जिसे देखने दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थल हैं

  • रोहतांग पास
  • चंबा
  • कांगड़ा
  • शिमला
  • कुल्लू
  • मनाली
  • डलहौजी

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रोहतांग दर्रा
मनाली से 150 किलोमीटर की दूरी पर और एक हजार एक सौ ग्यारह मीटर की उंचाई पर केलोंग हाईवे पर रोहतांग दर्रा स्थित है। यहां आकर आपको महसूस होगा कि दुनिया में सबसे ऊपर विशाल हिमालय पर्वत बांहे फैलाए आपका स्वागत कर रहा है।

चंबा
यह एक लुभावना हिमालयी शहर है और हिमाचल प्रदेश के कई आकर्षणों में से एक है। यह खूबसूरत शहर डलहौजी से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। इस शहर में ना सिर्फ सुंदर लैंडस्केप बल्कि कुछ बेहतरीन नक्काशीदार मंदिर भी हैं।

कांगड़ा
धार्मिक भाव रखने वाले लोगों के लिए यह पसंदीदा जगह है। कांगड़ा अपने प्राचीन मंदिरों के लिए मशहूर है। एडवेंचर खेलों की चाह रखने वालों और प्रकृति पे्रमियों के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है।

शिमला
यह राजधानी शहर होने के साथ साथ पर्यटन के लिहाज से देश में सबसे मशहूर जगह है। ब्रिटिश काल से ही शिमला एक लोकप्रिय हिल स्टेशन रहा है। कई पुरानी इमारतें शानदार ब्रिटिश वास्तुकला की याद दिलाती हैं और आज के इस आधुनिक शहर को पुराना फ्लेवर भी देती हैं।

कुल्लू
यह विशाल हिमालय की सबसे शानदार घाटियों में से एक है। यह आकर्षक कुल्लू घाटी ब्यास नदी के दोनों ओर फैली है। कुल्लू घाटी संुदर ही नहीं विशाल भी है और इसकी चैड़ाई दो किलोमीटर और लंबाई करीब आठ किलोमीटर है। एक हजार एक सौ तीस मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुल्लू की आबादी 381571 है।

डलहौजी
मार्च से जून का महीना इस घाटी को घूमने आने का सबसे अच्छा समय है, लेकिन अगर कोई हिमालय की सर्दियों के मज़े लेना चाहे तो दिसंबर से फरवरी के बीच भी आ सकता है। हरे भरे घास के मैदान, तेज बहते झरने, पहले कभी ना देखे ऐसे फूल और कुल मिलाकर सारा नज़ारा कुल्लू को धरती का स्वर्ग बनाता है। छह हज़ार से नौ हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित डलहौजी हिमालय की सुंदरता को बहुत अच्छी तरह प्रदर्शित करता है। हिमाचल प्रदेश में डलहौजी हिल स्टेशन धौलाधार पर्वत श्रृंखला की पश्चिमी सीमा पर पांच पहाड़ों के आसपास फैला है। डलहौजी स्काॅटिश और विक्टोरियन वास्तुकला की बहुतायत वाला एक असाधारण हिल स्टेशन है।

राज्य की प्रमुख भाषाओं में हिन्दी, काँगड़ी, पहाड़ी, पंजाबी और मंडियाली शामिल हैं। हिन्दू, बौद्ध और सिख यहाँ के प्रमुख धर्म हैं। पश्चिम में धर्मशाला, दलाई लामा की शरण स्थली है। हिमाचल प्रदेश में चित्रकला का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। प्रदेश की चित्रकला का राष्ट्र के इतिहास में उल्लेखनीय योगदान है। यहां की चित्रकला की संपदा अज्ञात थी। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हिमाचल तथा पंजाब के अनेक स्थानों पर चित्रों के नमूनों की खोज की गई। अपनी खूबसूरती और विविधता के कारण निश्चित तौर पर हिमाचल प्रदेश यात्रा करने का सबसे अच्छा स्थान है। बर्फ से ढंके पहाड़ों, हरे भरे जंगलों, लाल सेब के बागों और ताजा शुद्ध हवा के कारण राज्य में वह सब कुछ है जिसकी वजह से दुनिया भर के लोग इसकी ओर खिंचे चले आते हैं। शिमला, मनाली, चंबा आदि ऐसी जगहें हैं जहां सालभर दंपत्ति हनीमून मनाने आते हैं। इसके अलावा लोग यहां पहाड़ों के रोमांच, रिवर राफ्टिंग, आईस स्केटिंग, पैरा ग्लाईडिंग और स्किइंग के मजे करने या फिर शांतिपूर्ण छुट्टी बिताने आते हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां मंदिर, चर्च, मठ, नदियां, हिल स्टेशन, वास्तुकला के नमूने और बाजार हैं।

हिमाचल वास्तव में ही हिम का घर है। हिमपात के साथ यहाँ सीधे तौर पर जीवन की सुख-समृद्धि जुड़ी हुई है। सर्दियों के दौरान यह सभी जगहें हिम की सफेद चादर में लिपटी रहती हैं। कुफरी जैसे आस-पास के इलाकों में दिसंबर से मार्च तक बर्फ जमी रहती है जो सैलानियों के लिए आकर्षण बनी रहती है। एक खास बात यह कि यदि आप यहाँ हिमपात के दिनों में आ रहे हैं तो कालका-शिमला के बीच चलने वाली छुक-छुक रेल में जरूर बैठें। विश्व धरोहर का दर्जा हासिल कर चुकी इस रेल लाइन पर हिमपात के दौरान सफर करने का अपना अलग ही आनंद है जो बरसों जेहन में समाया रहता है।

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